विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | अंतरिक्ष अनुसंधान
पेरिस/बेंगलुरु: भारत की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने अपने द्विपक्षीय अंतरिक्ष अनुसंधान संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए रणनीतिक सहयोग को वर्ष 2032 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन (International Space Summit) के दौरान हस्ताक्षर किए गए।
भविष्य के संयुक्त मिशन और तकनीकी साझेदारी
इस नए विस्तार के तहत दोनों अंतरिक्ष एजेंसियां अत्याधुनिक वैज्ञानिक अभियानों और डेटा साझाकरण में एक-दूसरे का सहयोग करेंगी। प्रमुख वैज्ञानिक मिशन जिनमें दोनों एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं:
- आदित्य-L1 (Aditya-L1): सूर्य के अध्ययन के लिए भारत के पहले सौर मिशन में डेटा विश्लेषण और ग्राउंड स्टेशन ट्रैकिंग सपोर्ट।
- प्रोबा-3 (Proba-3): ईएसए के सन-ऑब्जर्विंग मिशन के तहत तकनीकी सहायता।
- चन्द्रयान-5 (Chandrayaan-5): चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के और गहरे अध्ययन के लिए आगामी चंद्र मिशन हेतु ट्रैकिंग और संचार तकनीक का आदान-प्रदान।
इस साझेदारी से न केवल दोनों एजेंसियों के बजटीय दबाव में कमी आएगी, बल्कि डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन और अंतरिक्ष में उपग्रह आधारित सुरक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास में भी मदद मिलेगी।
