शासन एवं चुनाव | राष्ट्रीय समाचार
नई दिल्ली: भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा देश भर में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के कारण मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर सुधार देखने को मिल रहा है। बिहार से शुरू हुए इस देशव्यापी अभियान के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक अमान्य, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
अभियान की आवश्यकता और विवाद
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत पारदर्शी, सटीक और दोहरे नामों से मुक्त बनाना है। हालाँकि, इतने बड़े पैमाने पर नामों को हटाए जाने के कारण राजनीतिक गलियारों में गहन बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने की आशंका जताई है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और स्थापित कानूनी दिशानिर्देशों के तहत की जा रही है।
मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुँचा है, जहाँ शीर्ष अदालत ने प्रक्रिया में किसी भी यांत्रिक या बिना नोटिस की गई कटौती पर चुनाव आयोग से जवाब माँगा है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने स्थानीय बीएलओ (BLO) के माध्यम से या ऑनलाइन पोर्टल द्वारा पुनः पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है।
