उत्तराखंड के उच्च हिमाचली क्षेत्रों और संवेदनशील ट्रेकिंग मार्गों पर तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने नए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं। हाल ही में रुद्रप्रयाग के प्रसिद्ध तुंगनाथ एवं केदारनाथ ट्रेक मार्ग के आसपास घटित दुर्घटनाओं को देखते हुए पुलिस व एसडीआरएफ (SDRF) को 24 घंटे हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है।
तुंगनाथ ट्रेक पर रेस्क्यू ऑपरेशन और सुरक्षा समीक्षा
20-21 सितंबर की मध्यरात्रि तुंगनाथ ट्रेक पर गणेश मंदिर के समीप एक महिला यात्री के खाई में गिरने की घटना के बाद आपदा प्रबंधन विभाग की टीमों ने त्वरित सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर महिला को सुरक्षित निकाला। इस घटना के तत्काल बाद जिला मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग ने सम्पूर्ण ट्रेकिंग रूट का सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश जारी किए हैं।
नवीनतम तकनीक और ड्रोन सर्विलांस का उपयोग
आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा संवेदनशील पहाड़ी ढलानों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों (Landslide Zones) और संकरे पैदल मार्गों पर रात के समय आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रमुख बिंदुओं पर थर्मल कैमरों वाले ड्रोन से निगरानी की जा रही है ताकि रात में किसी भी आपात स्थिति में फंसे यात्री को तुरंत खोजा जा सके।
तीर्थयात्रियों के लिए एडवाइजरी
उत्तराखंड पर्यटन विभाग और पुलिस प्रशासन ने चारधाम यात्रा और आसपास के ट्रेकिंग रूट्स पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी जारी की है:
- शाम 6 बजे के बाद बिना गाइड अथवा अधिकृत समूह के दुर्गम ट्रेक मार्गों पर जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
- सभी यात्रियों को राज्य के ‘स्मार्ट सिटी पोर्टल’ या ई-पास प्रणाली के माध्यम से अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- मौसम विभाग (IMD) की चेतावनियों के अनुसार ही उच्च हिमाचली क्षेत्रों की ओर प्रस्थान करें।
दीर्घकालिक रणनीति
राज्य सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में इको-सेंसिटिव जोन और ट्रेकिंग रूट्स पर स्थायी आपातकालीन शेल्टर और वायरलेस कनेक्टिविटी बूथ स्थापित करने के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या दुर्घटनाओं के समय ‘रिस्पॉन्स टाइम’ को कम से कम करना है।
