चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र औली में भारत और अमरीकी थल सेना के बीच जारी संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ अपने अंतिम और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। 22वें संस्करण के इस अभ्यास में दोनों देशों की सेनाएं दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों और जंगल युद्ध तकनीकों (Jungle Warfare) का गहन प्रशिक्षण ले रही हैं।
अभ्यास के मुख्य बिंदु और स्वदेशी रक्षा उपकरण
अभ्यास के दौरान भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और अमरीका की 11वीं एयरबोर्न डिविजन के लगभग 600 सैनिक संयुक्त रूप से भाग ले रहे हैं। औली में नव-निर्मित फॉरेन ट्रेनिंग नोड (FTN) में सैनिकों ने भारत में निर्मित AK-203 राइफलों के साथ इंडोर फायरिंग और रॉक-फेस रैपलिंग (चट्टानों से उतरने) का कड़ा अभ्यास किया।
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, इस सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय इलाकों में ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ (IBG) की कार्यकुशलता को बढ़ाना और एक-दूसरे की सर्वोत्तम परिचालन रणनीतियों का आदान-प्रदान करना है। इसमें आधुनिक तकनीकों जैसे- सर्विलांस ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग भी शामिल है। यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते सामरिक संबंधों को दर्शाता है।
