उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जस्टिस सुभाष उपाध्याय स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दी मंजूरी


उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जस्टिस सुभाष उपाध्याय स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दी मंजूरी

नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में प्रमोट करने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में आयोजित सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के संबंध में एक बड़ा निर्णय लिया गया। कॉलेजियम ने अपनी आधिकारिक बैठक (जो 23 सितंबर 2026 को आयोजित हुई थी) के बाद 24 सितंबर को जारी विस्तृत बयान में इसकी औपचारिक घोषणा की।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए ऐतिहासिक निर्णय: उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ और स्थायी बनाने की दिशा में, कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश (Permanent Judge) के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी है। अब तक वे इस अदालत में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी इस स्थायी नियुक्ति से राज्य की न्याय प्रणाली में मुकदमों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण में खासी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अन्य उच्च न्यायालयों में भी हुईं नियुक्तियां: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य महत्वपूर्ण उच्च न्यायालयों जैसे गौहाटी उच्च न्यायालय (जहां न्यायमूर्ति कौशिक गोस्वामी को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया है), केरल उच्च न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों को भी स्थायी जज के रूप में पदोन्नत करने की संस्तुति की गई है।

नियम और प्रक्रिया: न्यायिक परंपरा के अनुसार, किसी भी अतिरिक्त न्यायाधीश को स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने से संबंधित प्रस्ताव पर विचार करते समय संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं। इनमें माह-वार मामलों के निस्तारण, दिए गए निर्णयों की गुणवत्ता और विधि पत्रिकाओं (Law Journals) में प्रकाशित मामलों की संख्या का प्रमाणित विवरण शामिल होता है। इन सभी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय के नाम पर मुहर लगाई है। इस निर्णय का उत्तराखंड के कानूनी हलकों में स्वागत किया गया है।नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में प्रमोट करने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में आयोजित सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के संबंध में एक बड़ा निर्णय लिया गया। कॉलेजियम ने अपनी आधिकारिक बैठक (जो 23 सितंबर 2026 को आयोजित हुई थी) के बाद 24 सितंबर को जारी विस्तृत बयान में इसकी औपचारिक घोषणा की।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए ऐतिहासिक निर्णय: उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ और स्थायी बनाने की दिशा में, कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश (Permanent Judge) के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी है। अब तक वे इस अदालत में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी इस स्थायी नियुक्ति से राज्य की न्याय प्रणाली में मुकदमों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण में खासी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अन्य उच्च न्यायालयों में भी हुईं नियुक्तियां: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य महत्वपूर्ण उच्च न्यायालयों जैसे गौहाटी उच्च न्यायालय (जहां न्यायमूर्ति कौशिक गोस्वामी को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया है), केरल उच्च न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों को भी स्थायी जज के रूप में पदोन्नत करने की संस्तुति की गई है।

नियम और प्रक्रिया: न्यायिक परंपरा के अनुसार, किसी भी अतिरिक्त न्यायाधीश को स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने से संबंधित प्रस्ताव पर विचार करते समय संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं। इनमें माह-वार मामलों के निस्तारण, दिए गए निर्णयों की गुणवत्ता और विधि पत्रिकाओं (Law Journals) में प्रकाशित मामलों की संख्या का प्रमाणित विवरण शामिल होता है। इन सभी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय के नाम पर मुहर लगाई है। इस निर्णय का उत्तराखंड के कानूनी हलकों में स्वागत किया गया है।

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