कोटद्वार में जीएमओयू की वित्तीय अनियमितताओं का मामला फिर चर्चा में, 1.81 करोड़ रुपये के कथित गबन की जांच की मांग

फर्जी वाउचर और काल्पनिक खर्चों के जरिए भुगतान का आरोप, तीन वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग; पुलिस को सौंपी गई शिकायत

कोटद्वार। गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू) में कथित वित्तीय अनियमितताओं का एक और मामला सामने आया है। कंपनी प्रबंधन की ओर से की गई जांच के आधार पर करीब 1.81 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी को लेकर पुलिस से शिकायत की गई है। शिकायत में वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जीएमओयू के संयुक्त सचिव नितिन रावत ने पुलिस उपाधीक्षक को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि कंपनी के कोटद्वार स्थित मुख्यालय में फर्जी प्रार्थना पत्र और वाउचर तैयार कर रकम निकालने का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, कंपनी की जांच समिति की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और विशेष मुख्य लेखा अधिकारी की 6 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

फर्जी वाउचर और काल्पनिक खर्चों के जरिए भुगतान का आरोप

तीन वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड की जांच की मांग, संयुक्त सचिव ने पुलिस को दी शिकायत; पूर्व पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

कोटद्वार। गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू) में कथित वित्तीय अनियमितताओं का एक और मामला सामने आया है। कंपनी प्रबंधन की जांच में करीब 1.81 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का मामला उठाया गया है। आरोप है कि फर्जी प्रार्थना पत्र, वाउचर और काल्पनिक खर्चों के आधार पर कंपनी की रकम निकाली गई। मामले में जीएमओयू के संयुक्त सचिव नितिन रावत ने पुलिस उपाधीक्षक को शिकायत सौंपकर जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। कंपनी प्रबंधन की ओर से कराई गई जांच के बाद यह मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, जांच समिति ने 17 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट दी थी, जबकि विशेष मुख्य लेखा अधिकारी की रिपोर्ट 6 अक्टूबर 2026 की बताई गई है। इन रिपोर्टों में वित्तीय लेन-देन से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किए जाने का दावा किया गया है।

फर्जी नामों और वाउचर के आधार पर भुगतान का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जीएमओयू मुख्यालय में कुछ पदाधिकारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान दर्शाए। इसमें वाहन स्वामियों के नाम पर कागजात तैयार करने और ऐसे खर्च दिखाने के आरोप शामिल हैं, जिनकी वास्तविकता की जांच की मांग की गई है।

मामले में पूर्व अध्यक्ष, तत्कालीन महाप्रबंधक, सहायक लेखाधिकारी, लेखा लिपिक, कैशियर और स्टेशन इंचार्ज की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि, इन लोगों की संलिप्तता अभी आरोपों के स्तर पर है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

एडवांस और डीजल फंड समेत कई मदों में गड़बड़ी का दावा

शिकायत के मुताबिक, वाहन स्वामियों के एडवांस, डीजल फंड, दान, मरम्मत, वेतन और ट्रैफिक व्यवस्था के नाम पर किए गए भुगतानों में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि इन मदों में 1.25 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान की प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया गया।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ भुगतान मृत वाहन स्वामियों के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी प्रार्थना पत्रों और वाउचर के आधार पर किए गए। इसके अलावा ऐसे कर्मचारियों के नामों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है, जो संबंधित स्थानों पर कभी कार्यरत नहीं रहे थे।

पहले भी सामने आ चुका है वित्तीय अनियमितताओं का मामला

जीएमओयू में इससे पहले मार्च 2025 में भी कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया था। अब एक और शिकायत के सामने आने के बाद कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और आंतरिक निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग तेज हो गई है।

शिकायत में अलग-अलग वित्तीय वर्षों की रकम का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन उपलब्ध विवरण में आंकड़ों को लेकर स्पष्टता जरूरी है। इसलिए 1.81 करोड़ रुपये को इस मामले में सामने आया कथित आंकड़ा माना जाना चाहिए। कुल नुकसान और प्रत्येक वित्तीय वर्ष में हुई अनियमितता की वास्तविक राशि की पुष्टि मूल लेखा दस्तावेजों से होना आवश्यक है।

पुलिस जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

संयुक्त सचिव नितिन रावत ने पुलिस से शिकायत की जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। अब मामले में पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से वित्तीय लेन-देन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

महत्वपूर्ण: शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी और कथित गबन की वास्तविक राशि को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अभी सिद्ध नहीं मानी जा सकती।

एडवांस, डीजल फंड और मरम्मत के नाम पर भुगतान पर सवाल

शिकायत के मुताबिक, वाहन स्वामियों के एडवांस, डीजल फंड, दान, मरम्मत, वेतन और ट्रैफिक व्यवस्था जैसे मदों में भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन मदों के तहत 1.25 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान में अनियमितताएं हुईं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में मृत वाहन स्वामियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी प्रार्थना पत्र और वाउचर तैयार किए गए। इसके अलावा ऐसे कर्मचारियों के नामों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है, जो संबंधित स्थानों पर कभी कार्यरत नहीं रहे थे।

तीन वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड की जांच की मांग

जीएमओयू प्रबंधन की शिकायत में अलग-अलग वित्तीय वर्षों के भुगतान और लेखा रिकॉर्ड की जांच पर जोर दिया गया है। शिकायत के विवरण में 2022-23 के दौरान करीब 1.81 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता और 2023-24 व 2024-25 के दौरान 3.85 करोड़ रुपये के गबन का भी उल्लेख है।

इन आंकड़ों के बीच कुल राशि और अलग-अलग वित्तीय वर्षों के हिसाब को लेकर स्पष्टता जरूरी है। इसलिए जांच रिपोर्ट और मूल लेखा दस्तावेजों के सत्यापन के बिना कुल कथित नुकसान की अंतिम राशि बताना उचित नहीं होगा।

जीएमओयू में पहले भी वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद यह नया आरोप कंपनी के वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान में वास्तव में क्या अनियमितताएं हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।


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