उत्तराखंड(SIR): राज्य में 17 लाख से अधिक नाम हटाए गए

उत्तराखंड के चुनावी और प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा फेरबदल सामने आया है। राज्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में व्यापक स्तर पर संशोधन किया गया है। यह सघन अभियान 6 जनवरी 2025 से शुरू होकर 3 अक्टूबर 2026 तक लंबी अवधि तक चला। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना था, ताकि आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे और प्रत्येक पात्र नागरिक को उसका लोकतांत्रिक अधिकार मिल सके।

आंकड़े और विस्तृत विश्लेषण:

राज्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उत्तराखंड में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 84,29,459 थी, जो अब घटकर 71,58,949 रह गई है। इस प्रकार कुल 17,05,130 (17 लाख से अधिक) नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य के युवाओं और पात्र नए नागरिकों को मताधिकार से जोड़ने के लिए 4,01,276 (4 लाख से अधिक) नए मतदाताओं के नाम जोड़े भी गए हैं।

नाम हटाने के कारण (ASDD श्रेणियां):

निर्वाचन आयोग के सख्त दिशानिर्देशों के तहत जो 17 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, उन्हें मुख्य रूप से ‘एएसडीडी’ (ASDD – Absent, Shifted, Dead and Duplicate) श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसमें वे मतदाता शामिल हैं जो सत्यापन के दौरान अपने पंजीकृत पते पर अनुपस्थित (Absent) पाए गए, जो अन्य स्थानों पर स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु (Dead) हो चुकी है, या जिनके नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज (Duplicate) थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के माध्यम से घर-घर जाकर और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अत्यंत पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है।

प्रभाव और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

इस बड़े पैमाने पर हुए फेरबदल ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां निर्वाचन आयोग इसे मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध करने और निष्पक्ष चुनाव कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया के तौर-तरीकों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से आने वाले समय में चुनावी समीकरणों और मतदान प्रतिशत पर गहरा असर पड़ेगा। राज्य के राजनीतिक दल अब इन आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी वैध मतदाता अपनी त्रुटि के बिना सूची से बाहर न रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *