अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव, चार साल बाद सेवा से बाहर होने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों को मिलेगा ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’; उत्तराखंड में करीब 4200 युवा दे रहे सेवाएं, नैनीताल के 144 जवानों को जनवरी तक होना था रिटायर
देहरादून। अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निवीरों को चार साल की निर्धारित सेवा के बाद दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले का सीधा लाभ उत्तराखंड के करीब 1200 अग्निवीरों को मिलने की संभावना है, जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे जवान शामिल हैं जो इसी साल दिसंबर में अपनी चार साल की सेवा पूरी कर घर लौटने वाले थे।
केंद्र सरकार के इस फैसले से अग्निवीरों को सेना में छह साल तक सेवा देने का अवसर मिलेगा। हालांकि, यह विस्तार स्वतः स्थायी नियुक्ति नहीं है। पहले की व्यवस्था के अनुसार 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जाना है, जबकि शेष 75 प्रतिशत को दो साल के अतिरिक्त सेवा अवसर का विकल्प मिलेगा। इस अवधि के बाद नियमित सैनिक के रूप में भर्ती होने का अवसर भी निर्धारित चयन मानकों और जवानों की सहमति पर निर्भर करेगा। Press Information Bureau+2
सरकारी फैसले के बाद उत्तराखंड में भी इसके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वर्तमान में राज्य के करीब 4200 युवा अग्निवीर के रूप में सेना में सेवाएं दे रहे हैं। उपलब्ध राज्य स्तरीय रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से करीब 1200 जवान तत्काल इस नई व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं। इस साल दिसंबर में ही 800 से अधिक अग्निवीरों की चार साल की सेवा पूरी होने वाली थी। Hindustan
नैनीताल के 144 अग्निवीरों की सेवानिवृत्ति टली
इस फैसले का असर नैनीताल जिले के अग्निवीरों पर भी पड़ेगा। सैनिक कल्याण विभाग के सेवानिवृत्त कर्नल अधिकारी रमेश भट्ट के अनुसार, जिले के कुल 144 अग्निवीर 31 जनवरी 2027 तक अपनी चार साल की सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त होने वाले थे। इनमें 123 अग्निवीर 31 दिसंबर 2026 और शेष 21 जवान 31 जनवरी 2027 को सेवा पूरी करने वाले थे।
केंद्र के नए निर्णय से इन जवानों को भी अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, संबंधित जवानों की पात्रता और चयन प्रक्रिया के अनुसार ही इसका लाभ मिलेगा।
धामी सरकार ने रोजगार और पुनर्वास की जिम्मेदारी बदली
सेवा पूरी करके लौटने वाले अग्निवीरों के रोजगार और पुनर्वास को लेकर उत्तराखंड सरकार ने भी अपनी व्यवस्था में बदलाव किया है। अब इसकी जिम्मेदारी कार्मिक विभाग से हटाकर सैनिक कल्याण विभाग को सौंप दी गई है। सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में अवसर बढ़ाने की दिशा में कदम उठा चुकी है। समूह-ग के वर्दीधारी पदों की भर्ती में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार संबंधी मामलों के लिए छह सदस्यीय अग्निवीर प्रकोष्ठ का गठन भी किया गया था। अब सेवा विस्तार के फैसले के बाद इस प्रकोष्ठ की भूमिका और कार्ययोजना में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।
पूर्व अग्निवीरों के लिए स्वरोजगार योजनाओं के तहत पात्रता और निर्धारित मानकों के अनुसार 15 से 30 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा वीर उद्यमी योजना के माध्यम से उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था भी की गई है।
सीएम धामी ने प्रधानमंत्री का जताया आभार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों के लिए दो साल के ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ को मंजूरी देना युवाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल का आभार जताते हुए कहा कि यह निर्णय युवाओं की क्षमता पर विश्वास और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
परिजनों की मांग- छह नहीं, कम से कम 15 साल हो सेवा
केंद्र सरकार के फैसले से अग्निवीर परिवारों को राहत जरूर मिली है, लेकिन उनके मन में भविष्य की स्थिरता को लेकर सवाल अब भी बरकरार हैं। परिजनों का कहना है कि दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अग्निवीरों को नियमित सैनिकों की तरह लंबी सेवा का अवसर मिलना चाहिए।
हल्द्वानी के शीशमहल निवासी देवेंद्र मेहरा का बेटा लवकुश सिंह करीब डेढ़ साल पहले अग्निवीर बना था। देवेंद्र मेहरा का कहना है कि अग्निवीरों का कार्यकाल छह साल के बजाय कम से कम 15 साल होना चाहिए। उनका मानना है कि पेंशन और नियमित सेवा से जुड़ी सुविधाओं के अभाव में युवाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। ऐसे में केवल दो साल का विस्तार पर्याप्त नहीं है।
वहीं हल्द्वानी निवासी कुंवर सिंह का कहना है कि उनका बेटा तीन साल पहले अग्निवीर बना था। उन्होंने कहा कि दो साल के अतिरिक्त सेवा विस्तार के बजाय अग्निवीरों को स्थायी नियुक्ति दी जानी चाहिए। इससे युवाओं को भविष्य की चिंता से मुक्ति मिलेगी और सेना में लंबे समय तक देशसेवा करने का अवसर भी प्राप्त होगा।
अग्निवीरों के सामने अब भी भविष्य की स्थिरता का सवाल
केंद्र सरकार के नए फैसले ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती युवाओं को अतिरिक्त समय और नियमित सेवा में शामिल होने का एक और अवसर दिया है। हालांकि, परिजनों की मांग है कि इस व्यवस्था को और व्यापक बनाया जाए, ताकि सेना में सेवा देने वाले युवाओं को रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता मिल सके।
उत्तराखंड जैसे सैन्य परंपरा वाले राज्य में यह मुद्दा खास महत्व रखता है। अब देखना होगा कि केंद्र के नए फैसले के बाद राज्य सरकार अग्निवीरों के रोजगार और पुनर्वास की व्यवस्था को किस तरह आगे बढ़ाती है।
