देहरादून। उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। मानदेय में बढ़ोतरी, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और सामाजिक सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। गांधी पार्क से शुरू हुआ जुलूस हाथीबड़कला चौक के पास पुलिस बैरिकेडिंग पर रोक दिया गया। इस दौरान आगे बढ़ने की कोशिश कर रही कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी और सुशीला खत्री ने कहा कि मानदेय वृद्धि को लेकर शासन और निदेशालय स्तर पर कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक इस संबंध में शासनादेश जारी नहीं किया गया है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
60 साल बाद सेवा समाप्त, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का इंतजाम नहीं
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें बिना नियमित पेंशन और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा के सेवा से अलग कर दिया जाता है। ऐसे में वर्षों तक विभागीय जिम्मेदारियां निभाने के बाद उनके सामने आर्थिक असुरक्षा की स्थिति पैदा हो जाती है।
संगठन ने मांग की कि मानदेय बढ़ाने के साथ सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए एकमुश्त आर्थिक सहायता और नियमित मासिक पेंशन की व्यवस्था की जाए।
नौ नवंबर को मुख्यमंत्री की घोषणा का आश्वासन
आंदोलन के बीच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल की शासन स्तर पर वार्ता भी हुई। संगठन के मुताबिक, वार्ता के दौरान आश्वासन दिया गया कि नौ नवंबर को मुख्यमंत्री की ओर से इस संबंध में घोषणा की जाएगी। हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर स्पष्ट निर्णय और मानदेय वृद्धि का लिखित शासनादेश चाहिए।
प्रदेश उपाध्यक्ष विमला कोहली, प्रदेश महामंत्री ममता बादल समेत गीता चौहान, विजयलक्ष्मी, रितेश चौहान, दिनीता देवी, सोनी, पुष्पा सजवाण, रेखा रौथाण, मधु पुंडीर, तनु लांबा और रीना देवी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल रहीं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन कामकाज का बहिष्कार, दीपावली पर काला दिवस मनाने की चेतावनी
आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन को और व्यापक करने का ऐलान किया है। संगठन के अनुसार, 23 अक्टूबर से प्रदेशभर की कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर, बीएलओ से जुड़े कार्यों सहित अन्य ऑनलाइन और ऑफलाइन विभागीय गतिविधियों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया हुआ है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी नहीं किया गया तो प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर तालाबंदी की जाएगी। साथ ही दीपावली को काले दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इससे प्रदेश में आंगनबाड़ी सेवाओं और उनसे जुड़ी सरकारी गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
- मानदेय बढ़ाकर 24,000 रुपये प्रतिमाह करने का शासनादेश तत्काल जारी किया जाए।
- सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता और नियमित मासिक पेंशन दी जाए।
- कार्य के अनुरूप उचित पारिश्रमिक, आवश्यक संसाधन और नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
- कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और असम्मानजनक व्यवहार पर रोक लगाई जाए।
- लंबित मांगों के समाधान के लिए उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की जाए।
आउटसोर्स कर्मचारियों ने भी उठाई समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग
देहरादून। प्रदेश में कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक और मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। सरकारी विभागों और निगमों में कार्यरत 11,267 आउटसोर्स कर्मचारियों ने उपनल कर्मचारियों की तर्ज पर समान वेतन, नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग उठाई है।
इस संबंध में संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पांडे से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। संघ ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को वेतन, सेवा शर्तों और रोजगार की सुरक्षा के मामले में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या 11,267 है, जबकि करीब 309 कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा चुका है। संघ ने समान कार्य के लिए समान वेतन, नियमितीकरण, समान सेवा नियमावली और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
वार्ता के बाद सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पांडे ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों पर नीतिगत स्तर पर विचार कर समाधान की दिशा में कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
प्रतिनिधिमंडल में संघ के संरक्षक प्रवीन थपलियाल, मुकेश पाल, अध्यक्ष मंगलेश लखेड़ा, महामंत्री पान सिंह चिलवाल और कोषाध्यक्ष संजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रदेश में कर्मचारी आंदोलनों से बढ़ी सरकार की चुनौती
एक ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मानदेय और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सड़क पर उतर रही हैं, वहीं दूसरी ओर आउटसोर्स कर्मचारी समान वेतन और सेवा स्थायित्व की मांग उठा रहे हैं। इन दोनों आंदोलनों ने प्रदेश में संविदा, मानदेय और आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों की समस्याओं को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार वार्ता और आश्वासनों से आगे बढ़कर इन मांगों पर क्या ठोस निर्णय लेती है।
