अखिलेश यादव और खरगे के बयानों पर बाबा रामदेव की तीखी टिप्पणी, बोले— भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें

हरिद्वार में रामदेव का बड़ा बयान, बोले— भारत में नहीं होगा बांग्लादेश या नेपाल जैसा तख्तापलट; 30 अक्टूबर से सनातन और भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगा मंथन

हरिद्वार। योग गुरु स्वामी रामदेव ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल और सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि भारत में बांग्लादेश, श्रीलंका या नेपाल जैसे हालात पैदा होने और तख्तापलट की कल्पना करना गलत है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है और सत्ता परिवर्तन का रास्ता संविधान तथा चुनाव से होकर गुजरता है।

कनखल स्थित पतंजलि योगपीठ में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान रामदेव से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयानों को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल के नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें या उनकी सद्गति दें।

सड़क पर उतरने से नहीं बदलती सत्ता: रामदेव

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस और न्यायपालिका जैसी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ऐसे में किसी दूसरे देश की तरह तख्तापलट या बगावत की आशंका जताना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों को सत्ता में आना है, वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से जनता का समर्थन हासिल करें। सड़कों पर उतरकर असंवैधानिक तरीके से सत्ता परिवर्तन नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान ने राजनीतिक बयानों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लेकर नई चर्चा को जगह दी है।

सनातन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी बोले रामदेव

राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ रामदेव ने सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति है। वेदों और भारतीय ज्ञान परंपरा में मानव कल्याण का संदेश निहित है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार तथा शराब से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण के महारास को विकृत रूप में प्रस्तुत करने और भगवान शिव को नशे से जोड़कर दिखाने जैसी बातें भारतीय परंपराओं को लेकर भ्रम पैदा करती हैं। रामदेव के अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर किसी भी तरह की टिप्पणी तथ्यों तथा प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।

30 अक्टूबर से जुटेंगे विद्वान, सनातन पर होगा मंथन

स्वामी रामदेव ने बताया कि 30 अक्टूबर से पतंजलि योगपीठ में भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का 52वां सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि तथा विद्वान शामिल होंगे।

सम्मेलन में सनातन धर्म, वैदिक परंपराओं, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और देवी-देवताओं से जुड़े कथित विवादित चित्रण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। रामदेव ने कहा कि इन मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद परिषद का दृष्टिकोण प्रस्तावों के माध्यम से सामने रखा जा सकता है।

जाति के आधार पर अपमान का किया विरोध

सामाजिक समानता पर बात करते हुए रामदेव ने कहा कि किसी भी जाति के व्यक्ति का अपमान स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दलितों के सम्मान की बात करते हुए कहा कि जिस तरह दलित का अपमान अनुचित है, उसी तरह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य का अपमान भी गलत है।

उन्होंने समाज में भेदभाव के बजाय समानता, आपसी सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अब नजर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर

रामदेव के इस बयान में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं—एक ओर राजनीतिक बयानबाजी और सत्ता परिवर्तन पर उनकी स्पष्ट टिप्पणी, तो दूसरी ओर सनातन परंपराओं और सामाजिक समानता को लेकर उनका पक्ष। अब इस बयान पर संबंधित राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।

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