वैश्विक बाजार में छाने को तैयार देवभूमि के उत्पाद: उत्तराखंड की प्रसिद्ध हल्दी और राजमा

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के पारंपरिक और जैविक कृषि उत्पादों को अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और बहुत बड़ा बाजार मिलने जा रहा है। अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, औषधीय गुणों और शुद्धता के लिए विख्यात उत्तराखंड की पहाड़ी हल्दी (Hill Turmeric) और स्वाद में बेजोड़ राजमा (Hill Rajma) अब भारत की सीमाओं को पार करते हुए सीधे कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाजारों में अपनी पहुंच बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। राज्य सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक जिला दो उत्पाद’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत यह उपलब्धि प्रदेश के कृषि और बागवानी क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वैश्विक ई-कॉमर्स दिग्गजों जैसे अमेजन ग्लोबल (Amazon Global) और वॉलमार्ट (Walmart) के साथ स्थानीय कृषि उत्पादक संगठनों (FPOs) और सहकारी समितियों के माध्यम से हुए अनुबंधों के जरिए इन उत्पादों का निर्यात सुगम बनाया गया है। उत्तराखंड के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि राज्य के दूरदराज के इलाकों में पैदा होने वाली जैविक फसलों को वैश्विक बाजार मिलना चाहिए ताकि पलायन की समस्या पर रोक लग सके और किसानों की आय में अप्रत्याशित वृद्धि हो सके।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों जैसे चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में उगाई जाने वाली राजमा अपनी खास मिठास और कम समय में पकने की खूबी के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के बीच हमेशा से लोकप्रिय रही है। इसी प्रकार, पहाड़ी हल्दी में ‘कर्क्यूमिन’ (Curcumin) की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद फायदेमंद मानी जाती है। अब तक उचित मार्केटिंग और वैश्विक मंचों के अभाव में किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता था, परंतु अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जुड़ने से स्थानीय किसानों सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा और बेहतर मुनाफा कमाने का अवसर मिलेगा।

राज्य के उद्यान और कृषि विभाग ने इस दिशा में एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती करने, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और आधुनिक मानकीकरण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर ये उत्पाद शत-प्रतिशत खरे उतर सकें। कनाडा और यूएई में रह रहे भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ वहां के स्थानीय उपभोक्ता भी अब प्रामाणिक जैविक भारतीय मसालों और दालों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिसकी मांग में लगातार उछाल देखा जा रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय निर्यात समझौतों से उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक सुदृढ़ संबल मिलेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि आधारित स्टार्टअप्स और स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे। सरकार की इस पहल से न केवल किसानों का आर्थिक स्तर सुधरेगा, बल्कि वैश्विक फलक पर ‘मेड इन उत्तराखंड’ ब्रांड एक भरोसेमंद और प्रीमियम ऑर्गेनिक ब्रांड के रूप में स्थापित होगा।

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