संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पड़ोसी देश पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और उसे बिना नाम लिए “आतंकवाद का धारावाहिक अभ्यासकर्ता” (Serial Practitioner of Terrorism) करार दिया। विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पार से चलाए जा रहे आतंकवाद को सामान्य मानने या इसके परिणामों से बचने की किसी भी कोशिश को भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा और अपनी क्षेत्रीय अखंडता व नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कठोर कदम उठाता रहेगा।
अपने वक्तव्य के दौरान विदेश मंत्री ने वैश्विक आतंकवाद, सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और वैश्विक वित्तीय संस्थानों द्वारा आतंकी वित्तपोषण (Terror Financing) पर ढिलाई बरतने के मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति (State Policy) के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, वे अंततः खुद उसी आग में झुलस जाते हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान द्वारा लगातार मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग पर चुटकी लेते हुए कहा कि दुनिया अब ऐसे दोहरे मानदंडों से भली-भांति परिचित हो चुकी है।
इसके साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधारों की वकालत को पुनः दोहराया। विदेश मंत्री के इस रुख को रूस का भी मजबूत समर्थन मिला। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में वैश्विक दक्षिण (Global South), विशेष रूप से भारत और ब्राजील को स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए, ताकि वैश्विक बहुपक्षवाद अधिक समावेशी और प्रासंगिक बन सके। लावरोव ने पश्चिमी देशों द्वारा सुरक्षा परिषद के विस्तार का विरोध करते हुए एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के अधिक प्रतिनिधित्व का समर्थन किया।
भारत के इस कड़े रुख की वैश्विक कूटनीतिक हलकों में व्यापक सराहना हो रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के मंच से दिया गया यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत अब किसी भी वैश्विक दबाव के बिना अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों का संचालन करेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने यह भी संकेत दिया कि भारत आने वाले दिनों में जी-20 और ब्रिक्स जैसे अन्य वैश्विक मंचों पर भी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने की अपनी मुहिम को और तेज करेगा।
