नई दिल्ली/देहरादून (16 सितंबर 2026): उत्तर भारत के जल और ऊर्जा संकट के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की उपस्थिति में नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते पर सहमति जताई।
परियोजना का विवरण और ढांचा:
किशाऊ परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर निर्मित की जाएगी। ₹15,624 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रैविटी बांध बनाया जाएगा। बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी।
ऊर्जा एवं सिंचाई लाभ:
- जल विद्युत उत्पादन: इस बांध से 422 मेगावाट स्वच्छ जल विद्युत उत्पन्न होगी, जिससे प्रति वर्ष लगभग 1,476 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। उत्पादित बिजली का लाभ भागीदार राज्यों को आवंटित किया जाएगा।
- सिंचाई और पेयजल: इस परियोजना से उत्तर भारत के 97,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को नई सिंचाई सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
आर्थिक एवं क्षेत्रीय विकास:
यह समझौता कई वर्षों से लंबित था। इस अंतर-राज्यीय जल विवाद के हल होने से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को प्रत्यक्ष रोजगार, जल विद्युत रॉयल्टी और क्षेत्रीय अवसंरचना विकास के रूप में बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।
