श्रीदेव सुमन विवि की क्रूर लापरवाही: संघर्षरत ‘अकेली माँ’ के अरमानों पर फिरा पानी, 49 नंबर पाकर भी मेधावी बेटी ‘फेल विवि के वाइस चांसलर को देना चाहिए इस्तीफा

श्रीदेव सुमन विवि की क्रूर लापरवाही: संघर्षरत ‘अकेली माँ’ के अरमानों पर फिरा पानी, 49 नंबर पाकर भी मेधावी बेटी ‘फेल’!संवाददाता लोकजन एक्सप्रेस देवप्रयाग (टिहरीगढ़वाल): उत्तराखंड के श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय (SDSUV) की लचर कार्यप्रणाली अब छात्रों के भविष्य के साथ-साथ उनके अभिभावकों के खून-पसीने की कमाई को भी निगल रही है। ताजा मामला देवप्रयाग के ओमकारानंद सरस्वती राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का है, जहाँ एक असहाय और संघर्षरत माँ की मेधावी बेटी को विश्वविद्यालय की डेटा फीडिंग की गलती ने ‘फेल’ करार दे दिया है।एक माँ का संघर्ष, सिस्टम की संवेदनहीनता छात्रा सुनीता के सिर से पिता का साया उठ चुका है। उनकी माता, सम्मा देवी, एक ‘अकेली माँ’ (Single Mother) के रूप में विपरित परिस्थितियों से लड़कर, दिन-रात मेहनत मजदूरी कर अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिला रही थीं। उन्हें उम्मीद थी कि बेटी पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बनेगी, लेकिन विश्वविद्यालय की एक लापरवाही ने उस माँ की बरसों की तपस्या पर पानी फेर दिया है।RTI ने खोली विभाग की पोलअगस्त 2025 में जब बीएससी फाइनल ईयर का रिजल्ट आया, तो सुनीता को जूलॉजी में ‘फेल’ दिखाया गया। अपनी मेहनत पर अडिग सुनीता ने जब RTI के माध्यम से अपनी उत्तर पुस्तिका निकलवाई, तो सच सामने आया। सुनीता को वास्तव में 49 अंक मिले थे, जो पास होने के लिए पर्याप्त से भी ज्यादा थे। लेकिन विवि के पोर्टल पर उन्हें फेल दिखाकर उनकी पूरी मेहनत को शून्य कर दिया गया।भविष्य दांव पर: न पढ़ाई बची, न वजीफा विश्वविद्यालय की इस ‘सांप-सीढ़ी’ वाली कार्यप्रणाली का खामियाजा सुनीता को भारी पड़ा है:MSc में प्रवेश नहीं: रिजल्ट में फेल होने के कारण वह पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला नहीं ले सकीं।छात्रवृत्ति (Scholarship) का नुकसान: आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए छात्रवृत्ति ही आगे की पढ़ाई का सहारा थी, जिससे वह वंचित हो गईं।एक साल की बर्बादी: बिना किसी गलती के छात्रा का पूरा एक कीमती साल बर्बाद हो गया।”एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ एक माँ अपनी जमीन-आसमान एक कर बेटी को पढ़ाती है और विश्वविद्यालय के क्लर्क एक बटन दबाकर उसका साल बर्बाद कर देते हैं।” — स्थानीय निवासी का आक्रोशअब क्या होना चाहिए? (निष्कर्ष)यह केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक गरीब परिवार के खिलाफ ‘सिस्टम का अपराध’ है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:सुनीता का रिजल्ट 24 घंटे के भीतर सुधारा जाए।छात्रा को हुए मानसिक और शैक्षणिक नुकसान के लिए विश्वविद्यालय उचित मुआवजा दे।दोषी अधिकारियों और डेटा ऑपरेटरों पर सख्त कार्रवाई हो।

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