डॉ. मंजू बाला को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित त्रि भाषा तकनीक से पढ़ाती है बाला

चंपावत की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजू बाला को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार त्रिभाषा तकनीक से शिक्षा को सरल बनाने के लिए दिया गया है। डॉ. मंजू बाला उत्तराखंड की एकमात्र शिक्षिका हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। वह हिंदी अंग्रेजी और कुमाऊंनी में पढ़ाती हैं। प्रकाश चंद्र उपाध्याय और नरेश चंद्र जोशी को भी शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

त्रिभाषा तकनीक से शिक्षा को सहज-सरल बनाकर विद्यार्थियों तक पहुंचाने वाली प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका डा. मंजू बाला को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने सम्मानित किया।

57 वर्षीय मंजू बाला इस वर्ष यह पुरस्कार पाने वाली उत्तराखंड की एकमात्र शिक्षिका हैं। 2005 से प्राथमिक शिक्षा में कार्यरत डा. मंजू गांव में किराए के कमरे में रहती हैं। अपने विद्यालय के बच्चों के साथ ही हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी इंग्लिश की कोचिंग देती हैं।

विषय पर अच्छी समझ के लिए विद्यार्थियों को हिंदी, इंग्लिश के साथ मातृ भाषा कुमाऊंनी में पढ़ाने की तकनीक को काफी सराहा गया है। नई शिक्षा नीति त्रिभाषा तकनीक को प्रोत्साहित करने पर जोर देती है।

शिक्षक उपाध्याय व जोशी को शैलेश मटियानी सम्मान

लोहाघाट: जीआइसी बापरू में कार्यरत सहायक अध्यापक प्रकाश चंद्र उपाध्याय व राजकीय हाईस्कूल पासम के सहायक अध्यापक नरेश चंद्र जोशी को शैलेश मटियानी पुरस्कार दिया गया है। दून में आयोजित समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह, सीएम पुष्कर धामी व शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने पुरस्कृत किया।

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