उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) के विधान सभा भवन में आज, 27 अक्टूबर 2026 से पंचम उत्तराखंड विधानसभा का बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण सत्र आधिकारिक रूप से आरंभ हो गया है। उत्तराखंड के राज्यपाल द्वारा संविधान प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस सत्र को आहूत किया गया था, जो राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र में बना हुआ है। सत्र के पहले ही दिन राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है, जहां एक ओर धामी सरकार राज्य के विकास और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्ताव व विधेयक पटल पर रखने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने सरकार को घेरने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
सत्र के पहले दिन की शुरुआत से ही भराड़ीसैंण और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद नजर आ रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लगभग 1,500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। विधान सभा परिसर के चारों ओर त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है ताकि सत्र की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके। हालांकि, सुरक्षा के कड़े पहरे के बावजूद राजनीतिक दलों और संघों के तेवर आक्रामक बने हुए हैं। सत्र के पहले दिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, प्रदेश प्रधान संगठन और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) सहित कई अन्य संगठनों ने विधानसभा का घेराव करने का खुला ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे राज्य की वर्तमान समस्याओं, स्थानीय निकायों के अधिकारों, कानून व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों पर सरकार से कड़े जवाब मांगेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र आगामी चुनावी समीकरणों और राजनीतिक नूराकुश्ती के लिहाज से बेहद अहम होने वाला है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य में पारदर्शी शासन और सुशासन का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की फिराक में है। हाल ही में सूबे में उभरे कुछ सामाजिक और प्रशासनिक विवादों के बाद विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार मिल गया है, जिसका असर सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह देखने को मिल सकता है।
संसदीय कार्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सत्र के दौरान सरकार लगभग 7,000 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) सदन के पटल पर रख सकती है, जिसका मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास, आपदा प्रबंधन और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान करना है। इसके साथ ही लगभग आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विधेयक भी इस सत्र के दौरान चर्चा और पारित होने के लिए लाए जाने की संभावना है। सरकार का प्रयास रहेगा कि बिना किसी बड़े व्यवधान के इन विधेयकों को पारित कराया जाए, जबकि विपक्षी दल हर बिल पर तीखी बहस और संशोधन की मांग करने के लिए एकजुट नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और प्रधान संगठन का मुखर विरोध भी इस सत्र के दौरान एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पंचायतों के अधिकारों और वित्तीय विकेंद्रीकरण को लेकर स्थानीय निकाय सरकार से नाराज चल रहे हैं। कुल मिलाकर, गैरसैंण का यह सत्र देवभूमि की राजनीति में नए उबाल के साथ शुरू हुआ है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने और अपने राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहे हैं।
