केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि निजी और कॉर्पोरेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से इलाज के नाम पर मनमाने और अत्यधिक शुल्क (Overcharging) वसूलना एक गंभीर ‘चिकित्सा कदाचार’ (Medical Malpractice) है। सरकार ने इस पर लगाम कसने के लिए सख्त विनियामक तंत्र बनाने की बात कही है।
विस्तृत विवरण:
अदालत में चल रही एक सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का व्यवसायीकरण इस हद तक नहीं होना चाहिए कि आम नागरिक के लिए इलाज कराना असंभव हो जाए। अस्पतालों द्वारा मेडिकल बिलों में भारी-भरकम और अनावश्यक खर्चे जोड़कर मरीजों का आर्थिक शोषण करने की शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित विनियामक निकायों ने न्यायालय को अवगत कराया है कि देश भर के अस्पतालों में मूल्य पारदर्शिता (Price Transparency) और मानकीकरण के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। इसके तहत दवाओं की कीमतें, चिकित्सीय जांच (Diagnostics) के शुल्क और बेड चार्जेस एक निर्धारित सीमा के भीतर ही रखे जाने चाहिए। इस कदम से आम जनता को स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रही लूट-खसोट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। न्यायालय ने भी इस मामले में सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए स्वास्थ्य ढांचे को अधिक जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए हैं।
