भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय एवं मैदानी इलाकों में बारिश की तीव्र गतिविधि दर्ज की गई है। पिछले 48 से 72 घंटों के दौरान राज्य के पांच प्रमुख जिलों—बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और उधम सिंह नगर में अत्यधिक वर्षा (Red Alert) दर्ज किए जाने के बाद अब प्रशासन ने अलर्ट लेवल की समीक्षा की है।
29 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार, यद्यपि राज्यव्यापी कोई आपातकालीन बंद या रेड अलर्ट लागू नहीं है, फिर भी कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के जिलाधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के अधिकार दिए गए हैं। कई संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर मलबे के कारण यातायात बाधित हुआ था, जिसे लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सीमा सड़क संगठन (BRO) की मदद से तेजी से साफ किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग और स्थानीय निकायों ने स्पष्ट किया है कि जिन जिलों में नदियां उफान पर हैं या भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, वहां स्थानीय स्तर पर स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी या समय में बदलाव का निर्णय लिया जा सकता है। अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी नदियों के जलस्तर पर केंद्रीय जल आयोग (CWC) निरंतर निगरानी रख रहा है।
आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचा
उत्तराखंड सरकार ने मानसून के अंतिम चरण में होने वाले नुकसान से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। मुख्यमंत्री धामी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि सड़कों, पेयजल लाइनों और बिजली की आपूर्ति में व्यवधान आने पर उन्हें 24 घंटे के भीतर बहाल किया जाए।
आपदा राहत कोष से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत सामग्री पहुँचाई जा सके। विशेष रूप से केदारनाथ और बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित डेंजर ज़ोन पर पोकलैंड और जेसीबी मशीनों को तैनात रखा गया है ताकि चारधाम यात्रियों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
