कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने की प्रेसकांफ्रेंस, सीएम विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का लगाया आरोप

कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग को लेकर सवाल उठाए। उनका कहा कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार कुछ जिलों में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का दुरुपयोग हो रहा है।

आरोप लगाया कि चंपावत और उधमसिंह नगर में कुछ लोगों को हर वर्ष दो से तीन लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जबकि कई गरीब और जरूरतमंद लोगों को मात्र तीन हजार रुपये की ही सहायता मिल पा रही है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की असमानता से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी और लालचंद शर्मा सहित अन्य कार्यकर्ता भी पत्रकारवार्ता में मौजूद रहे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • कोष का दुरुपयोग: हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष, जो आमतौर पर गरीबों के इलाज और सहायता के लिए होता है, उसका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा रहा है।
  • कमीशनखोरी का आरोप: उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश के सभी विभागों में कमीशनखोरी का ग्राफ बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुँच गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कमीशनखोरी कांग्रेस के समय भी थी, लेकिन वर्तमान में यह अपनी सीमाएं पार कर चुकी है।
  • एलपीजी और महंगाई का मुद्दा: रावत ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर मिलने में 45 दिन की देरी हो रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 25 दिन में मिल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें खुद सिलेंडर “ब्लैक” में खरीदना पड़ा।
  • खनन और फंड का विवाद: इससे पहले भी रावत ने भाजपा पर 30 करोड़ रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अवैध खनन की कमाई से बनाने का आरोप लगाया था और मांग की थी कि इस पैसे को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में जमा कर आपदा पीड़ितों की मदद की जानी चाहिए।

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