पतंजलि का तेल और अमूल का दही फेल, एफएसडीए जांच में खुलासा, 1260 लीटर तेल जब्त

देहरादून: योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि और देश के विश्वसनीय डेयरी ब्रांड अमूल के उत्पादों की गुणवत्ता पर बड़ा खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में पतंजलि का रिफाइंड तेल और अमूल का दही शुद्धता के मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट आने के बाद उपभोक्ताओं के बीच आक्रोश फैल गया है और कंपनियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

पतंजलि के गोदाम पर छापा, 1260 लीटर तेल जब्त

एफएसडीए की टीम ने 29 अप्रैल को बेलीपार क्षेत्र स्थित पतंजलि के सुपर डीलर तेजस्वी ट्रेडर्स के गोदाम पर छापा मारा था। जांच के दौरान 1260 लीटर सोयाबीन और पाम रिफाइंड तेल जब्त किया गया। तेल को टूटे टिनों से निकालकर प्लास्टिक ड्रमों में भरकर रखा गया था, जो खाद्य सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है।
प्रयोगशाला रिपोर्ट में तेल का नमूना फेल घोषित किया गया है, यानी यह उपभोक्ता तक पहुंचने लायक नहीं था।

अमूल का दही भी अधोमानक निकला

सितंबर में एफएसडीए टीम ने गोलघर क्षेत्र में एक वाहन से अमूल ब्रांड का दही जब्त किया था। जांच रिपोर्ट में यह दही भी मानक से नीचे पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में अगली कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

उपभोक्ताओं का भरोसा टूटा, एफएसडीए सख्त मोड में

पतंजलि और अमूल दोनों ही कंपनियां वर्षों से “विश्वसनीय” ब्रांड के रूप में जानी जाती हैं, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद उपभोक्ताओं का भरोसा हिल गया है।
एफएसडीए ने चेतावनी दी है कि किसी भी ब्रांड को गुणवत्ता से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। अन्य कंपनियों और डीलरों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

1.3 लाख करोड़ के कारोबार पर सवाल

अमूल का कारोबार लगभग 90,000 करोड़ रुपये, जबकि पतंजलि का टर्नओवर 40,000 करोड़ रुपये के करीब है। ऐसे में मानकों की अनदेखी पर सवाल उठ रहा है कि मुनाफे की होड़ में शुद्धता और उपभोक्ता स्वास्थ्य को क्यों दांव पर लगाया जा रहा है?

अब उत्तराखंड में भी एफडीए अलर्ट मोड में है, क्योंकि दोनों कंपनियों के उत्पाद यहां गांव से लेकर शहर तक बड़ी मात्रा में बिकते हैं। आने वाले दिनों में राज्य में भी सैंपलिंग और जांच अभियान चलाए जाने की संभावना है।

यह मामला केवल दो ब्रांड्स का नहीं, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा और खाद्य मानकों की गंभीरता से जुड़ा है। देश को ऐसे सख्त कदमों की ज़रूरत है जो “ब्रांड की शुद्धता” को कागज़ों से निकालकर उपभोक्ताओं की थाली तक पहुंचा सकें।

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